Tuesday, November 3, 2009
संत परम्परा का सूत्रपात
संत परम्परा का सूत्रपात मुख्यतः नामदेव से माना जाता है .इनका कल १३ वीं सदी में था ,तथा ये मराठी और हिन्दी दोनों में भजन लिखते थे .गुरु ग्रन्थ साहिब में इनके ६० पद संग्रहित हैं .कबीर के गुरु रामानंद इस परम्परा के तीसरी कड़ी है , किंतु हिन्दी संत काव्य की दृढ़ नीव रखने वाले ,उसे सम्मान्य बनने वाले और सबसे अधिक प्रतिभाशाली कवि कबीरदास हुए है .कबीर के अलावा पिपसेना ,धना ,दादूदयाल ,रजब ,सुन्दरदास, गुरुनानक आदि संत हुए है.जो रामानंद को स्त्री विरोधी कहते है .उन्हें यह भी देखना चाहिए की पद्मावती ,सुरसरी ,बबरिसहिबा जैसी स्त्रियाँ भी इस संत परम्परा में थी .
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