Tuesday, November 3, 2009

कबीर पर अध्ययन

कबीर पर अध्ययन का एकागी परिपेक्ष्य तैयार किया है। श्याम सुंदर दास ने कबीर को हिंदू धर्म का रक्षक बताया। वो यहीं नही रुक गए बल्कि आगे बढ़ कर कर कबीर को हिंदू भी साबित किया। इक्षा तो उनकी कबीर को ब्राह्मण साबित करने की थी, कम से कम खून के लिहाज से। वे लिखते है -" मुस्लमान घर में पालित होने पर भी कबीर का हिंदू विचारों से सरोबार होना उनके शरीर में प्रवाहित होने वाले ब्राह्मण अथवा कम से कम हिंदू रक्त की और संकेत करता है। एसा लगता है मनो दास जी ने कबीर का ब्लड सैम्पल लिया हो। यह मानना कितना हास्यास्पद है की विचारो का निर्माण परिवेश नही अपितु रक्त से हटा है।
जिस हिंदू की बात आलोचक करते है आख़िर कबीर दास के लिए इसका अर्थ क्या था। उत्तर में हजारी प्रसाद द्विवेदी लिखते है " जहाँ जहाँ कबीर दास ने हिंदू शब्द का प्रयोग किया है, वहां वहां निम्नलिखित तीन शब्दों में से तीनो या दोनों का मतलब एक रहता है । ये तीन बाते है - वेद, ब्राहमण और पौराणिक मत । इन तीनो को मानने वाले को ही कबीर दास हिंदू कहते है । येही कारण है की कबीर दास मानव मात्र के लिए इक सामान और सर्वग्राही धर्म की वकालत करते है। क्योकि कबीर ने जंहा भी धर्मं का वयवहार किया है वंहा उनका अभिप्राय है दया, करुना, ज्ञान , अहिंसा, सदाचार । तभी तो - " जंहा यां है तह धर्म है , जंहा झूठ तह पाप। जंहा लाभ तह कल है, जंहा रिदमा तह आप।

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