Tuesday, November 3, 2009

भारतीय साहित्य, संस्कृति और साधना

आडम्बर में नहीं बल्कि उस रूप में आता है जो नितांत मानवीय शक्ल में है .सौ बातों की एक बात यह है की संत साहित्य का प्राण तत्त्व है -लोक धर्मं .

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